गज़ल
मेरा सूरज डूबा है तेरी शाम नहीं है
तेरे सर पर सेहरा है ईल्ज़ाम नहीं है।
इतना है कि मेरे लहु ने वृक्ष सींचा है
क्या हुआ अगर पत्तों पर मेरा नाम नहीं है।
मेरे हत्यारे ने गंगा में लहु धोया है
गंगा के पानी में कुहराम नहीं है ।
मस्जिद के कहने पर काज़ी के फ़तवे पर
अल्लाह को कत्ल करना ईस्लाम नहीं है।
यह सज़दे नहीं माँगता सर माँगता है
यारों का संदेशा है ईलहाम नहीं है।
मेरी चिन्ता न करना मन हो तो वापिस हो जाना
हम रुहों को तो बस आराम नहीं है ।
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